वस्ल और हिज्र कि बातें चलो बेमानी कर दें,
मिलें कुछ यूं कि बिछड़ने को शर्म से पानी पानी कर दें।
चाँद सितारों से सजी एक रात तेरे पहलू में चली आई है,
तेरे पहलू में हम भी सिमट के इस रात को रूमानी कर दें।
मेरी मोहब्बत का इश्तहार तेरे चेहरे पे नज़र आता है,
आ किसी दिन मिल के इसे सबकी ज़ुबानी कर दे।
कल शाम फिर एक दर्द नें दस्तक मारी ,
हमने तो समझा था कि आज मौत कि बारी है।
पर मौत पाना जिंदगी जितना आसान नहीं ए मासूम !
मौत का अपना एक रुतबा है जिंदगी तो बेचारी है।
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जवाब देंहटाएंबेचारी जिंदगी, सही कहा मौत बड़े नखरे होते हैं, बड़े रुतबे,और बड़ी मुश्किल से आती है
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