गुरुवार, 19 जून 2008

PRAAN URJAA

मेरा मानना है की जीवन के लिए पञ्च तत्वों की जरुरत होती है जिसकी उर्जा से हम जीवित रह सकते है। बड़ा ही क्रांतिकारी विचार है। मेरे अनुसार प्राण ही मुख्या उर्जा है जिसके आधार पर हम सब जीवित है.पञ्च तत्वों का यदि संवर्धन होता रहे तो प्राण उर्जा चलती रहेगी। सम्पूर्ण सृष्टि एक वृत में चक्र काट रही है। जल नदी से समुद्र में समुद्र से बादलों तक और फ़िर बादलों से वापस भूमि पर आता है। पञ्च तत्व अपने रूप बदलते है किंतु जीवन के संचालन में मुख्य भूमिका इन्ही तत्वों की रहती है .इस विशाल ब्रहमांड की संरचना में गीता में कई लोको की अवधारणा दी गई है.
किंतु इसके अभी तक इसके वैज्ञानिक प्रमाण नही मिले है शिवलिंग की व्याख्या के तहत ब्रहम अंड को जब किसी स्पेस में रख दिया गया तो इस सृष्टि की रचना शुरू हुई.स्पेस और टाइम सृष्टि की शुरुवात में शून्य था। उसी बिन्दु से स्पेस और टाइम ने फैलना शुरू किया। वेदों के इस विचार को की हर एक आत्मा में परमात्मा है हम पुनः विज्ञानं के विचार से देखना शुरू करते है। सृष्टि की मुख्य आत्मा टाइम और स्पेस है। विज्ञानं ने सिद्ध कर दिया है कि हर व्यक्ति के लिए टाइम अलग अलग होता है। मेरा मानना है कि स्पेस भी हर एक व्यक्ति के लिए अलग अलग होता है. अर्थात वो जिस नजर से दुनिया को देखता है वो नजरिया अलग होता है.और इसी नजरिये के फर्क से विचारों कि भिन्नता उत्पन होती है और दुनिया संचालित होती है। स्पेस और टाइम घटाया बढाया जा सकता है। मेरी तर्क विज्ञानी पाठकों को कुछ ठीक से समझ में आ रहें होंगे.मुद्दा फ़िर वही आता है कि गीता की ब्रहम एंड की अवधारणा कितनी तर्क संगत है। जिसमे स्पश्ताया दिया गया है कि ४,३२,००० मानव वर्षों का ब्रह्म का एक दिन होता है। कुल सृष्टि के ५३,२५,००० अरब वर्षों के बाद प्रलय हो जायेगी। निश्चय ही इस बात कि तार्किकता कोई जाँच नही सकता, किंतु स्पेस और टाइम की अवधारणा का उस ग्रन्थ में होना इस बात की प्रमाणिकता है की इतने पुराने ग्रंथों में भी हम विज्ञान में काफ़ी आगे थे। चर्चा को आगे बढ़ते हुए मैं ये कहना चाहूँगा की यदि आप अपने समाज या दुनिया के इतर कुछ देखना चाहेंगे तो हमने उनकी दृष्टि से देखना होगा। अब यही बात हम साइंस की भाषा में kahen तो एक रेफेरेंस फ्रेम की सारी यूनिट और paristhitiyan अलग अलग होती हैं और एक रेफेरेंस फ्रेम को दुसरे से सम्बंधित करने के लिया हमें realtive yunit chahiye

4 टिप्‍पणियां:

  1. हिन्दी चिट्ठाजगत में आपका स्वागत है. नियमित लेखन के लिए मेरी हार्दिक शुभकामनाऐं.

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  2. आप भविष्य में और भी उम्दा लेखन करेंगे, एसी उम्मीद बंटी है आपसे. शुभकामनाएं.
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    उल्टा तीर

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  3. sundar rachana.badhai ho.likhate rhe.

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