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rahul srivastava ki dunia
शनिवार, 20 अक्टूबर 2007
ग़मों कि भीड़ घेरे न हो ऐसा कोई लम्हा न
था.
कब्र में लेटा हुआ मासूम कभी इस तरह तनहा न था।
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एक था मच्छर
एक रात मैं सो रहा था ,मीठे सपनो में में खो रहा था ...
ग़मों कि भीड़ घेरे न हो ऐसा कोई लम्हा न था.कब्र मे...
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